मंगलवार, 29 सितंबर 2009

दीपावली--2009,दीपावली पर किए जाने वाले टोटके - कार्यसिद्धि के लिए


जिसके पास धन है उसी के सब मित्र होते हैं, उसी के सब भाई बंधु और पारिवारिक जन होते हैं। धनवान व्यक्ति को ही श्रेष्ठ व्यक्ति माना जाता है। जिसके पास धन हो, वह सुखपूर्वक अपना जीवन बिताता है। 1--आपका व्यवसाय यदि कम हो गया हो या किसी ने उसे बांध दिया हो, तो दीपावली से पूर्व धनतेरस के दिन पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर ‘धनदा यंत्र’ को स्थापित करें और धूप, दीप दिखाएं, नैवेद्य अर्पित करें। यह क्रिया करते समय मन ही मन श्रीं श्रीं मंत्र का जप करते रहें। प्रतिदिन नहा धोकर श्रीं यंत्र का निष्ठापूर्वक दर्शन करें।2--दीपावली पूजन के समय 501 ग्राम छुहारों का पूजन करें। उनका तिलक करें, धूप दीप से आरती उतारें, प्रसाद का भोग लगाएं और रात्रि भर पूजा स्थान पर रखा रहने दें। अगले दिन उन्हें लाल चमकीले या मखमली कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। 51 दिन तक प्रतिदिन एक रुपया किसी भी मंदिर में माता लक्ष्मी को अर्पित करें। इससे वर्ष भर लक्ष्मी स्थिर रहती है।3--कोर्ट कचहरी में मुकदमा चल रहा हो तो पांच गोमती चक्रों को दीपावली के दिन पूजन पर रखें। जब तारीख पर कोर्ट जाना हो तो उन्हें जेब में रख कर जाएं, जाते समय मन ही मन ईश्वर से विजय की प्रार्थना करते रहें, सफलता प्राप्त होगी।4--यदि आपका उधार लिया हुआ पैसा कोई लंबे अरसे से नहीं लौटा रहा हो तो, उस व्यक्ति का नाम लेकर ग्यारह गोमती चक्र पर तिलक लगा कर, इष्ट देव का स्मरण कर, उससे निवेदन करें, कि मेरा पैसा जल्द से जल्द लौटा दो। इसके बाद पूजित गोमती चक्रों को पीपल के वृक्ष के पास जमीन में दबा दें।5--व्यापार में हानि, धन नाश, बढ़ते कर्ज, व्यापार में बाधा आदि से मुक्ति पाने के लिए। दीपावली के दिन श्वेतार्क गणपति को गंगाजल से स्नान कराकर लाल वस्त्र पर रखें। फिर उनके समीप लाल चंदन का एक टुकड़ा, ग्यारह धनदायी कौड़ियां, ग्यारह गोमती चक्र एवं तांबे की पादुकाएं या तांबे का एक टुकड़ा रखें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सफेद कागज पर लाल चंदन से अपनी दुकान का नाम लिखकर इसी सामग्री के पास रखें। लाल चंदन की माला से ‘‘ॐ गं गणपतये नमः’’ का एक माला जप करें। लाल चंदन की माला न हो तो रुद्राक्ष की माला से भी जप कर सकते हैं। फिर सारी सामग्री को उसी लाल वस्त्र में लपेट कर पोटली बना लें और उसे लाल मौली या रिबन से बांधें, धूप दीप दिखाएं व व्यापार स्थल में उत्तर पूर्व दिशा में बांध दें। नित्य प्रातः व्यापार शुरू करने से पहले, उसे धूप दीप दिखाएं। ऐसा करते समय मन ही मन गणपति के पूर्वोक्त मंत्र का जप करते रहे। ऋण मुक्ति का यह बहुत प्रभावी उपाय है।6--गाय को प्रतिदिन दो रोटी तेल लगाकर गुड़ रखकर खिलाएं, पक्षियों को दाना व जल दें और अपनी आय में से दो गरीबों को भरपेट भोजन कराते रहें, लाभ होगा।7--कार्यसिद्धि के लिए कार्यसिद्धि यंत्र अत्यंत फलदायी है। अपनी मनोकामना को लाल चंदन से भोजपत्र पर लिख लें। लाल या पीले वस्त्र पर कार्यसिद्धि यंत्र स्थापित करें। अगरबत्तियां व घी का दीपक जलाएं और आरती उतारें। कार्य सिद्ध हो जाने पर प्रभु के नाम पर कोई सत्कार्य जैसे कार्य करने को कहें। उदाहरणतया पांच गरीबों को भोजन कराने, या घर में भजन कीर्तन कराने या फिर कोई भी सेवा करने का प्रण करें, कार्य सिद्ध हो जाने पर उसे भूलें नहीं।अब भोजपत्र को तह करके कार्यसिद्धि यंत्र के नीचे रख दें। नित्य प्रति पांच अगरबत्तियां जलाएं और प्रतिदिन इक्कीस बार यंत्र के सामने अपनी भोजपत्र पर लिखी मनोकामना को दोहराएं, अगरबत्तियों को मुख्यद्वार पर लगाएं। कुछ ही दिनों में आपका कार्य सिद्ध हो जाएगा।8--यदि कमाई का कोई जरिया न हो, तो एक गिलास कच्चे दूध में, चीनी डाल कर जामुन वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं। यह क्रिया धनतेरस से शुरू करें और चालीस दिन लगातार करें। कभी-कभी सफाई कर्मचारी को चाय की 250 ग्राम पत्ती या सिगरेट दान करें। सफेद धागे में दीपावली पूजन के पश्चात तांबे का सिक्का गले में पहनें। उस दिन रसोईघर में बैठकर भोजन करें। लाभ स्वयं महसूस करेंगे।9--घर में यदि किसी दिन कोई बच्चा सुबह उठते ही बिना कारण रोने लगे तो प्रत्येक सदस्य को बीस मिनट तक ॐ का उच्चारण करना चाहिए।10--दीपावली पूजन में लकड़ी की एक डिब्बी में सिंदूर की एक परत बनाकर उस पर पांच गोमती चक्र रखें और फिर सिंदूर से पूरी डिब्बी को भरकर लाल वस्त्र में लपेटकर धन स्थान में रख दें। जीवन भर पैसे का अभाव नहीं रहेगा।11--धन की आय, नित्य निरोग रहना, स्त्री का अनुकूल तथा प्रियवादिनी होना, पुत्र का आज्ञा में रहना तथा धन पैदा करने वाली विद्या का ज्ञान - ये छः बातें इस मनुष्य लोक में सुखदायिनी होती हैं। विदुरनीतिलक्ष्मी जी धन, ऋद्धि- सिद्धि तथा ऐश्वर्ययिनी हैं। उनके बिना देवता भी श्रीहीन हो जाते हैं। पुराणों में कथा है कि जब लक्ष्मी जी इंद्र से असंतुष्ट होकर क्षीरसागर में चली गईं तो स्वर्ग ऐश्वर्यहीन हो गया। सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से निवेदन किया और समुद्र मंथन किया गया। समुद्र से लक्ष्मी जी के साथ चैदह रत्न भी प्राप्त हुए। लक्ष्मी जी ने विष्णु भगवान का वरण किया। देवताओं ने लक्ष्मी जी से निवेदन कर उनका पूजन किया और लक्ष्मी जी ने प्रसन्न होकर धन ऐश्वर्य प्रदान किया। लक्ष्मी जी देवलोक में स्वर्गलक्ष्मी के नाम से, पाताललोक में नागलक्ष्मी, राजाओं के यहां राजलक्ष्मी तथा गृहस्थों के यहां गृहलक्ष्मी के रूप में जानी जाती हैं। आठों सिद्धियां प्रदान करने वाली अष्टलक्ष्मी इस प्रकार हैं- धन लक्ष्मी, ऐश्वर्यलक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और अधि लक्ष्मी।लक्ष्मी से संबंधित साधना हेतु दीपावली सर्वश्रेष्ठ समय है। दीपावली कालरात्रि होती है। इस दिन यंत्र-मंत्र-तंत्र की सिद्धि शीघ्र हो जाती है। इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा हर व्यक्ति करता है। दीपावली लक्ष्मीजी को रिझाने का दिन होता है।12--दीपावली की रात्रि में:श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, कनक धारा श्री यंत्र या लक्ष्मी यंत्र को पूजा स्थल पर दीपावली पर स्थापित करें और वर्ष भर प्रतिदिन किसी भी लक्ष्मी मंत्र का एक माला जप करते रहें। इससे धन आगमन बना रहता है।13--धनदायक यंत्र: दीपावली की रात्रि को इस यंत्र को लाल चंदन से या कस्तूरी से या गोरोचन से अखंडित भोजपत्र पर अनार की कलम से लिखें और गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के साथ पूजा स्थल पर स्थापित करें और कमलगट्टे की माला से निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जप करें। मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।बाद में इसी मंत्र को जपते हुए घी की आहुति 21 बार हवन में डालें। पूजन के पश्चात इसे धन रखने की जगह तिजोरी आदि में रखें। धन की बरकत बनी रहेगी।14--दीपावली के दिन अपने पूजा स्थल में प्राण प्रतिष्ठा युक्त श्री यंत्र या कनक धारा यंत्र की स्थापना करें और श्री सूक्तम के बारह पाठ करें और फिर प्रतिदिन दैनिक पूजा के साथ श्री सूक्तम के बारह पाठ करते रहें। इससे धनाभाव निश्चित रूप से दूर होता है।15--दीपावली के दिन कमलगट्टे की माला से ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नमः’ मंत्र का जप करें। ऐसा करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। फिर नियमित रूप से प्रतिदिन इससे एक माला जप करते रहें। इससे सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।चैंतीसा यंत्र: यह यंत्र सुख समृद्धिदायक माना गया है। इसे दीपावली की रात्रि या रवि पुष्य या गुरु पुष्य के दिन केसर की स्याही और अनार की लेखनी से भोज पत्र पर लिखंे। इसके बाद इसकी षोडशोपचार पूजा करें। यंत्र लिखते समय लक्ष्मी जी के किसी मंत्र का जप करते रहें। फिर इसे घर में या अपनी दुकान में कहीं भी रख सकते हैं। इससे लक्ष्मी जी का आगमन बना रहता है।16--व्यापार हेतु लाभदायक: यदि आप निरंतर व्यापार में घाटे से परेशान हैं तो यह प्रयोग अवश्य करें। इस यंत्र को चांदी अथवा सोने के पत्र पर किसी शुभ मुहूर्त में खुदवाएं। इसके लिए धन त्रयोदशी का दिन श्रेष्ठ है। फिर दीपावली के एक दिन पूर्व अर्थात् कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में इसे शुद्ध स्थान पर स्थापित करें। सफेद आसन पर बैठकर और सफेद वस्त्र पहनकर ‘‘ॐ ह्रीं श्रीं नमः’’ मंत्र का किसी भी सफेद माला से दस माला जप करें। यंत्र पूजन के लिए सफेद फूलों का प्रयोग करें। यह प्रयोग आगे 21 दिन तक करें। ऐसा करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। फिर इसे अपनी तिजोरी में या धन रखने के स्थान पर रखें, व्यापार में लाभ मिलने लगेगा ।इस प्रकार अनेकानेक यंत्र-मंत्र-तंत्र हैं जिनकी साधना कर हम धन समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। दीपावली के दिन अथवा किसी भी शुभ मुहूर्त में कोई न कोई साधना अवश्य करनी चाहिए ताकि धनागमन बना रहे इस बात को कभी न भूलें- लक्ष्मी जी का चित्र में मेरा कोई योगदन नहीं हैं मेरी पोती ने नेट से लोड कि हैं

9 टिप्‍पणियां:

  1. प० राजेश कुमार शर्मा30 सितंबर 2009 को 9:27 am

    मै आपका आभरी हुं स्नेह बनाये रखे

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  2. प० राजेश कुमार शर्मा30 सितंबर 2009 को 9:37 am

    मित्रो मेरा उद्धेश्य यह हैं कि प्रत्येक व्यक्ति तक वह सब जानकारियां जो छिपी हैं वह पहुचे आप भी इसमे सहयोग प्रदान करे।

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  3. ाज पहली बार ये ब्लाग देखा बहुत अच्छा लगा मैने भी 1974 से 1990 तक ज्योतिश का बहुत अध्ययन किया उसके बाद छोड दिया मगर जिग्यासािअब भी बनी रहती है धन्यवाद इन टोटकोंके लिये

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  4. पंडितजी आपका लेख बेहतरीन है, हम इसे अपनी वेबसाइट www.dharmareporter.com पर प्रकाशित करना चाहते हैं। अगर आपकी अनुमति हो तो कृपया dharmareporter@gmail.com पर मेल करें।
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