सोमवार, 17 अगस्त 2009

दुर्गा सप्तशति,दुर्गा के नौ रूप हवन के लिये आहुति की सामग्री

हमारे देश की आधुनिक ऐतिहासिक गवेषणा द्वारा यह सिद्ध हो गया है कि शक्ति की उपासना का अस्तित्व सदियों से चला आ रहा है जिसके प्रमाण सिन्धु नदी के प्रान्त में होहन जोदडों की खुदाई में मिले अवशेषों से स्पस्ट हो जाता है है कि इस खुदाई में जो मूर्तियां निकली हैं उसमेमं स्वास्तिक नन्दीपद, शिवलिंग और शक्ति की मूर्तियों हैं जिससे स्पष्ट हो जाता है कि शक्ति मां दुर्गा की उपासना सदियों से होती चली आ रही है।
नवरात्रों के प्रारम्भ होने से पूर्व अपने सभी मित्रों कों दुर्गा सप्तशती, के कुछ ऐसे तथ्यों पर ध्यान दिलाने का मन बना जो नव रात्रो के पश्चात हवन के समय प्रयोग में अवश्य लानी चाहिए, जिससे लाभ मिलता है दुर्गा सप्तशति के द्वादश (13) अध्याय हैं हवन के समय दुर्गा सप्तशति के किस अध्याय ममें हमें क्या करना है और किस श्लोक में आहुति हवन में डालनी है किसमें नहकीं यह बताने का प्रयास कर रहा हूं।
वैदिक आहुति की सामग्री
प्रथम अध्याय एक पान पर देशी घी में भिगोकर 1 कमलगटटा, 1 सुपारी, 2 लौंग, 2 छोटी इलायची, गुग्गुल, शहद यह सब चीजें सुरवा में रखकर खडे होकर आहुति देना।
द्वितीय अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, गुग्गुल विशेष।
त़ृतीय अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सं 38 शहद विशेष।
चतुर्थ अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक सं 1 से 11 मिश्री व खीर विशेष,
चतुर्थ अध्याय के मंत्र संख्या 24 से 27 तक इन 4 मंत्रों की आहुति नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से देह नाश होता है। इस कारण इन चार मंत्रों के स्थान पर ओंम नम: चण्डिकायै स्वाहा बोलकर आहुति देना तथा मंत्रों का केवल पाठ करना चाहिए इनका पाठ करने से सब प्रकार का भय नष्ट हो जाता है।
पंचम अध्‍याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सं 9 मंत्र कपुर, पुष्प व ऋतुफल से करें।
षष्टम अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सं 23 भोजपत्र।
सप्तम अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सं 10 दो जायफल श्लोक संख्या 19 में सफेद चन्दन श्लोक संख्या 27 में इन्द्र जौं।
अष्टम अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक संख्या 54 एवं 62 लाल चंदन।
नवम अध्याय प्रथम अध्याय की सा मग्री अनुसार श्लोक संख्या श्लोक संख्या 37 में 1 बेलफल 40 में गन्ना।
दशम अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक संख्या 5 में समुन्द्र झाग 31 में कत्था।
एकादश अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक संख्या 2 से 23 तक पुष्प व खीर श्लोक संख्या 29 में गिलोय 31 में भोज पत्र 39 में पीली सरसों 42 में माखन मिश्री 44 में अनार व अनार का फूल श्लोक संख्या 49 में पालक श्लोक सं54 एवं 55 में फूल चावल और सामग्री।
द्वादश अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक संख्या 10 में नींबू काटकर रोली लगाकर और पेठा श्लोक संख्या 13 में काली मिर्च श्लोक संख्या 16 ममें बाल खाल श्लोक संख्या 18 में कुशा श्लोक संख्या 19 में जायफल और कमल गटटां श्लोक संख्या 20 में ऋीतु फल फूल चावल और चन्दन श्लोक संख्या 21 पर हलवा और पुरी श्लोक संख्या 40 पर कमल गटटा मखाने और बादाम श्लोक संख्या 41 पर इत्र, फूल और चावल ।
त्रयोदश अध्याय प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सर्‍ंख्या 27 से 29 तक फल व फूल।
हमारा प्रयास यह हैं कि आपको नव रात्रो के व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो तथा माँ दुर्गा के नौ रूप आपको सदेव शक्ति भक्ति और ऐश्वर्य प्रदान करे।

7 टिप्‍पणियां:

  1. शुक्रिया इस महत्पूर्ण जानकारी के लिए

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  2. जानकारी के लिए धन्यवाद

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  3. बहुत हू महत्वपूर्ण जानकारी ..धन्यवाद ...

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  4. समयानुकूल बहुत बढिया जानकारी उपलब्ध करवाई है………आभार्।

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  5. आपका मै आभारी हू जो आपने इस पृष्ठ का अवलोकन कर अपने विचार दिये है

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  6. समय पर सही जानकारी उपलब्ध करने के लिए,
    कोटि कोटि धन्यवाद . मेरे विचार में यदि आपके ब्लाग पर
    सम्बंधित श्लोक पाठ एवम स्त्रोत भी उपलब्ध हो जाये तो ,
    पाठको के लिए अति उत्तम हो . धनयवाद .

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