शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009

दीपावली के शुभ दिन ''लक्ष्मी गणेश'' के चिन्ह



दीपावली के शुभ दिन लक्ष्मी आप सभी के घर पर पधारे तथा धन-धान्य से संपन्न करती रहे। मेरी तथा भृगु ज्योतिष अनुसन्धान केन्द्र समिति के सदस्यों कि ओर से आप सब शुभ हो, मंगलमयी हो, कल्याणकारी हो।साथ हि निवेदन भी जिस लक्ष्मी गणेश का आप पूजन करते हैं उन्हें उपहार के रूप में न दे''लक्ष्मी गणेश'' के चिन्ह

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2009

संसार में जिसके पास धन है उसी के सब मित्र होते हैं, उसी के सब भाई बंधु और पारिवारिक जन होते हैं।


संसार में जिसके पास धन है उसी के सब मित्र होते हैं, उसी के सब भाई बंधु और पारिवारिक जन होते हैं। धनवान व्यक्ति को ही श्रेष्ठ व्यक्ति माना जाता है। जिसके पास धन हो, वह सुखपूर्वक अपना जीवन बिताता है। धन की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्ति के लिए ऋग्वेद में वर्णित श्री सूक्त का पाठ एक ऐसी साधना है जो कभी निष्फल नहीं होती। मां लक्ष्मी के आह्वान एवं कृपा प्राप्ति के लिए श्री सूक्त पाठ की विधि द्वारा आप बिना किसी विशेष व्यय के भक्ति एवं श्रद्धापूर्वक मां लक्ष्मी की आराधना करके आत्मिक शांति एवं समृद्धि को स्वयं अनुभव कर सकते हैं।यदि संस्कृत में मंत्र पाठ संभव न हो तो हिंदी में ही पाठ करें। दीपावली पर्व पांच पर्वों का महोत्सव है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल द्वितीया (भैयादूज) तक पांच दिन चलने वाला दीपावली पर्व धन एवं समृद्धि प्राप्ति, व्यापार वृद्धि ऋण मुक्ति आदि उद्देष्यों की पूर्ति के लिए मनाया जाता है। श्री सूक्त का पाठ धन त्रयोदषी से भैयादूज तक पांच दिन संध्या समय किया जाए तो अति उत्तम है। धन त्रयोदषी के दिन गोधूलि वेला में साधक स्वच्छ होकर पूर्वाभिमुख होकर सफेद आसन पर बैठें। अपने सामने लकड़ी की पटरी पर लाल अथवा सफेद कपड़ा बिछाएं। उस पर एक थाली में अष्टगंध अथवा कुमकुम (रोली) से स्वस्तिक चिह्न बनाएं। गुलाब के पुष्प की पत्तियों से थाली सजाएं, संभव हो तो कमल का पुष्प भी रखें। उस गुलाब की पत्तियों से भरी थाली में मां लक्ष्मी एवं विष्णु भगवान का चित्र अथवा मूर्ति रखें। साथ ही थाली में श्रीयंत्र, दक्षिणावर्ती शंख अथवा शालिग्राम में से जो भी वस्तु आपके पास उपलब्ध हो,रखें। सुगंधित धूप अथवा गुलाब की अगरबत्ती जलाएं। थाली में शुद्ध घी का एक दीपक भी जलाएं। खीर अथवा मिश्री का नैवेद्य रखें। तत्पष्चात् निम्नलिखित विधि से श्री सूक्त की ऋचाओं का पाठ करें। ऋग्वेद में लिखा गया है कि यदि ऋचाओं का पाठ करते हुए शुद्ध घी से हवन भी किया जाए तो इसका फल द्विगुणित होता है।

शनिवार, 10 अक्टूबर 2009

17 अक्टूबर को चतुर्दशी के दिन ही दीपावली मनाई जाएगी

17 अक्टूबर को उदयतिथि चतुर्दशी दोपहर 12:38 बजे तक है। इसके बाद अमावस्या शुरू होगी, जो अगले दिन सुबह 11:04 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार प्रदोषकाल से रात्रि तक रहने वाली अमावस्या में दीपावली मनाया जाना उचित है। इस कारण 17 अक्टूबर को चतुर्दशी के दिन ही दीपावली मनाई जाएगी।’पांच दिवसीय दीपोत्सव 15 अक्टूबर को 4:40 बजे तक ही द्वादश तिथि रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी होने से धनतेरस भी मनेगी। 16 अक्टूबर को त्रयोदशी दोपहर 2:32 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी का दीपदान होगा। 17 अक्टूबर को चतुर्दशी दोपहर 12:38 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या शुरू होगी। इस लिए इसी दिन रात को लक्ष्मीपूजन के साथ दीपावली मनाई जाएगी। 18 अक्टूबर को अमावस्या सुबह 11:04 तक रहेगी। फिर प्रतिपदा शुरू होगी। इसी दिन गोवर्धन पूजा होगी। 19 अक्टूबर को प्रतिपदा सुबह 9:58 बजे तक रहेगी। इसके बाद भाईदूज का पर्व मनाया जा सकेगा।
रात्रि में वृषलग्न--07-21 से 09-15 तक मध्य रात्रि मे सिंह लग्न --02-00 से 04-16 तक चौघडियां मुहूर्त --शाम 05 से 07--28 तक शुभ अमृत तथा चर के चौघडियां रात्रि 09 से मध्य रात्रि 01--47बजे तक

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2009

पति की दीर्घायु के लिए

पति की दीर्घायु के लिए शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को किसी सुहागिन को लाल सिंदूर की डिब्बी, इत्र गुलाब की शीशी, आधा किलो चने की दाल और केसर का पत्ता या डिब्बी दान करें। ऐसा हर महीने दो शुक्रवार करंे, महालक्ष्मी और नारायण की असीम कृपा से पति दीर्घायु होंगे।

रविवार, 4 अक्टूबर 2009

विवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य का कारक होता है।

विवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य का कारक होता है।
करवा चौथः 07 अक्तूबर, 2009 को मनाया जायेगा यह कार्तिक कृष्णा चतुर्थी/कारक चतुर्थी/करवा चौथ के रूप में मनाते हैं। आप सभी जानते हैं कि करवाचौथ का पर्व मूल रूप से पति-पत्नी के बीच रिश्तों को और मजबूत करने का दिन होता है। खासकर जो नए जोड़े होते हैं, उनके लिए यह पर्व और भी मायने रखता है। एक-दूसरे को करीब से जानने और समझने का इससे बेहतर अवसर और क्या हो सकता है! लेकिन कुछ सालों से इसका स्वरूप काफी बदल गया है। करवा चैथ व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को किया जाता है। विवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत अखंड सौभाग्य का कारक होता है। विवाहित स्त्रियां इस दिन अपने प्राण बल्लभ की दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की कामना करके भगवान रजनीश (चंद्रमा) को अघ्र्य अर्पित कर व्रत को पूर्ण करती हैं। इस व्रत में रात्रि बेला में शिव, पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश और चंद्रमा के चित्रों एवं सुहाग की वस्तुओं की पूजा का विधान है। इस दिन निर्जल व्रत रखकर चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अघ्र्य अर्पण कर भोजन ग्रहण करना चाहिए। पीली मिट्टी की गौरी भी बनायी जाती है। कुछ स्त्रियां परस्पर चीनी या मिट्टी का करवा आदान प्रदान करती हैं। लोकाचार में कई स्त्रियां काली चिकनी मिट्टी के कच्चे करवे में चीनी की चासनी बनाकर डाल देती हैं अथवा आटे को घी में सेंककर चीनी मिलाकर लड्डू आदि बनाती हैं। पूरी-पुआ और विभिन्न प्रकार के पकवान भी इस दिन बनाए जाते हैं।

नव विवाहिताएं विवाह के पहले वर्ष से ही यह व्रत प्रारंभ करती हैं। चैथ का व्रत चैथ से ही प्रारंभ कराया जाता है। इसके बाद ही अन्य महीनों के व्रत करने की परम्परा है।नैवेद्य (भोग) में से कुछ पकवान ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित दान करें तथा अपनी सासू मां को 13 लड्डू, एक लोटा, एक वस्त्र, कुछ पैसे रखकर एक करवा चरण छूकर दे दें। शेखावाटी (राजस्थान) में एक विशेष परम्परा है। वहां स्त्रियां कुम्हारों के यहां से करवा लाकर गेहूं या बाजरा भूनकर सथिया करके आटे की बनी हुई 13 मीठी टिक्कियां, एक गुड़ की डली और चार आने के पैसे या श्रद्धानुसार विवाह के साल टीका चावल लगाकर गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कहानी सुनती हैं। करवा तथा पानी का लोटा रोली पाटे पर रखती हैं और कहानी सुनकर करवा अपनी सास के पैरों में अर्पित करती हैं। सास न हो तो मंदिर में चढ़ाती हैं।उद्यापन करें तो 13 सुहागिन स्त्रियों को जिमावें। 13 करवा करें 13 जगह सीरा पूड़ी रखकर हाथ फेरें। सभी पर रुपया भी रखें। बायना जीमने वाली स्त्रियों को परोस दें। रुपया अपनी सास को दे दें। 13 करवा 13 सुहागिन स्त्रियों को भोजन कराने के बीच दे दें।करवा चैथ का व्रत भारतीय संस्कृति के उस पवित्र बंधन या प्यार का प्रतीक है जो पति पत्नी के बीच होता है। भारतीय संस्कृति में पति को परमेश्वर माना गया है। यह व्रत पति पत्नी दोनों के लिए नव प्रणय निवेदन और एक दूसरे के प्रति हर्ष, प्रसन्नता, अपार प्रेम, त्याग एवं उत्सर्ग की चेतना लेकर आता है। इस दिन स्त्रियां नव वधू की भांति पूर्ण शृंगार कर सुहागिन के स्वरूप में रमण करती हुई भगवान रजनीश से अपने अखंड सुहाग की प्रार्थना करती हैं।स्त्रियां शृंगार करके ईश्वर के समक्ष व्रत के बाद यह प्रण भी करती हैं कि वे मन, वचन एवं कर्म से पति के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना रखेंगी तथा धर्म के मार्ग का अनुसरण करती हुई धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्राप्त करेंगी।कुंआरी कन्याएं इस दिन गौरा देवी का पूजन करती हैं। शिव पार्वती के पूजन का विधान इसलिए भी है कि जिस प्रकार शैलपुत्री पार्वती ने घोर तपस्या करके भगवान शंकर को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया वैसा ही सौभाग्य उन्हें भी प्राप्त हो। इस संदर्भ में एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार पांडवों के बनवास के समय जब अर्जुन तप करने इंद्रनील पर्वत की ओर चले गए तो बहुत दिनों तक उनके वापस न लौटने पर द्रौपदी को चिंता हुई। श्रीकृष्ण ने आकर द्रौपदी की चिंता दूर करते हुए करवा चैथ का व्रत बताया तथा इस संबंध में जो कथा शिवजी ने पार्वती को सुनाई थी, वह भी सुनाई। कथा इस प्रकार है।इंद्रप्रस्थ नगरी में वेद शर्मा नामक एक विद्वान ब्राह्मण के सात पुत्र तथा एक पुत्री थी जिसका नाम वीरावती था। उसका विवाह सुदर्शन नामक एक ब्राह्मण के साथ हुआ। ब्राह्मण के सभी पुत्र विवाहित थे। एक बार करवा चैथ के व्रत के समय वीरावती की भाभियों ने तो पूर्ण विधि से व्रत किया, किंतु वीरावती सारा दिन निर्जल रहकर भूख न सह सकी तथा निढाल होकर बैठ गई। भाइयों की चिंता पर भाभियों ने बताया कि वीरावती भूख से पीड़ित है। करवा चैथ का व्रत चंद्रमा देखकर ही खोलेगी। यह सुनकर भाइयों ने बाहर खेतों में जाकर आग जलाई तथा ऊपर कपड़ा तानकर चंद्रमा जैसा दृश्य बना दिया और जाकर बहन से कहा कि चांद निकल आया है, अघ्र्य दे दो। यह सुनकर वीरावती ने अघ्र्य देकर खाना खा लिया। नकली चंद्रमा को अघ्र्य देने से उसका व्रत खंडित हो गया तथा उसका पति अचानक बीमार पड़ गया। वह ठीक न हो सका। एक बार इंद्र की पत्नी इंद्राणी करवा चैथ का व्रत करने पृथ्वी पर आईं। इसका पता लगने पर वीरावती ने जाकर इंद्राणी से प्रार्थना की कि उसके पति के ठीक होने का उपाय बताएं। इंद्राणी ने कहा कि तेरे पति की यह दशा तेरी ओर से रखे गए करवा चैथ व्रत के खंडित हो जाने के कारण हुई है। यदि तू करवा चैथ का व्रत पूर्ण विधि-विधान से बिना खंडित किए करेगी तो तेरा पति ठीक हो जाएगा। वीरावती ने करवा चैथ का व्रत पूर्ण विधि से संपन्न किया जिसके फलस्वरूप उसका पति बिलकुल ठीक हो गया। करवा चैथ का व्रत उसी समय से प्रचलित है। सौभाग्य, पुत्र-पौत्रादि और धन-धान्य के इच्छुक स्त्रियों को यह व्रत विधि पूर्वक करना चाहिए और इस दिन विभिन्न प्रकार के बधावे गाने चाहिए।

शनिवार, 3 अक्टूबर 2009

दान कैसा हो और क्यों हो ?


दान कैसा हो और क्यों हो ?

जब से हमारे द्धारा नेट पर ब्लाक के माध्यम से आप सभी के सम्पर्क में आये हैं तो अनेक प्रश्नो को लिये हुए मेल प्राप्त हो रहे है सभी का उत्तर एक साथ नही दिया जा सकता इस कारण एक प्रश्न का उत्तर यहां देने का प्रयास है।

श्रीमद्भगवदगीता में भगवान कहते है
दातव्यमिति यद्दानं दीयतेनुपकारिणे।
देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्विकं स्मृतम।। श्रीमद्भगवदगीता (अ0 17)
जीवन में दान देना ही कर्तव्य/धर्म है - इस भाव से जो दान योग्य देश, काल को देखकर ऐसे पात्र व्यक्ति को दिया जाता है, जिसमें प्रत्युपकार की अपेक्षा नहीं होती है, वह दान सात्त्विक माना गया है। तदित्यनभिसन्धाय फलं यज्ञतपः क्रियाः ।
दानक्रियाश्च विविधाः क्रियन्ते मोक्षकांक्षिभि।। श्रीमद्भगवदगीता (अ0 17)
तत् शब्द का उच्चारण कर , फल की इच्छा नहीं रखते हुए, मुमुक्षुजन यज्ञ, तप, दान आदि विविध कर्म करते है। बहुत से शिष्यो का प्रश्न होता हैं मुक्ति कैसे मिलती है दान कर्तव्य समझकर योग्य व्यक्ति को बिना किसी अपेक्षा के देना चाहिए। दान करने से अहंकार का नाश होता है। अहंकार के अभाव में, अन्तःकरण की पूर्वार्जित वासनाएं नष्ट हो जाती हैं और नई वासनाएं उत्पन्न नहीं होती। यह भी मुक्ति का एक मार्ग है। "दानशीलता ऐसा प्रयास है, जिसके जरिए आप अपने जीवन का दायरा बढ़ाने और अपने चारों ओर के समस्त तत्वों को समाहित करने का प्रयास करते हैं। इसके जरिए आप दूसरों की जरुरतों को उतना ही महत्त्वपूर्ण मानने की कोशिश करता हैं जितनी कि आपकी खुद की जरुरतें हैं। हमारे सस्थांन / केन्द्र के ज्योतिषाचायों के अनुभव का लाभ उठायें। हिन्दु शास्त्रो में कहां गया हैं नवरात्रो से लेकर गोवर्धन के पश्चात तक संसार को चलाने वाले सभी देवी देवता धरती पर रहकर जनकल्याण के कार्यो को करते हैं तथा उन भक्तो की सुनते हैं जो उन्हे अपने कष्टो के निवारणार्थ पुकारते हैं। यदि आप अपने लग्न चक्र , राशि के आधार पर जानना चाहते है कि आपको दीपावली पर क्या करना चाहिये जिससे आपके घर में लक्ष्मी का सदा निवास करे, प्रसन्न रहे तो हमारे को मेल पर नाम एवं जन्म तिथि जन्म समय जन्म स्थान भेजकर करे और ज्ञात करे।

मंगलवार, 29 सितंबर 2009

दीपावली--2009,दीपावली पर किए जाने वाले टोटके - कार्यसिद्धि के लिए


जिसके पास धन है उसी के सब मित्र होते हैं, उसी के सब भाई बंधु और पारिवारिक जन होते हैं। धनवान व्यक्ति को ही श्रेष्ठ व्यक्ति माना जाता है। जिसके पास धन हो, वह सुखपूर्वक अपना जीवन बिताता है। 1--आपका व्यवसाय यदि कम हो गया हो या किसी ने उसे बांध दिया हो, तो दीपावली से पूर्व धनतेरस के दिन पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर ‘धनदा यंत्र’ को स्थापित करें और धूप, दीप दिखाएं, नैवेद्य अर्पित करें। यह क्रिया करते समय मन ही मन श्रीं श्रीं मंत्र का जप करते रहें। प्रतिदिन नहा धोकर श्रीं यंत्र का निष्ठापूर्वक दर्शन करें।2--दीपावली पूजन के समय 501 ग्राम छुहारों का पूजन करें। उनका तिलक करें, धूप दीप से आरती उतारें, प्रसाद का भोग लगाएं और रात्रि भर पूजा स्थान पर रखा रहने दें। अगले दिन उन्हें लाल चमकीले या मखमली कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। 51 दिन तक प्रतिदिन एक रुपया किसी भी मंदिर में माता लक्ष्मी को अर्पित करें। इससे वर्ष भर लक्ष्मी स्थिर रहती है।3--कोर्ट कचहरी में मुकदमा चल रहा हो तो पांच गोमती चक्रों को दीपावली के दिन पूजन पर रखें। जब तारीख पर कोर्ट जाना हो तो उन्हें जेब में रख कर जाएं, जाते समय मन ही मन ईश्वर से विजय की प्रार्थना करते रहें, सफलता प्राप्त होगी।4--यदि आपका उधार लिया हुआ पैसा कोई लंबे अरसे से नहीं लौटा रहा हो तो, उस व्यक्ति का नाम लेकर ग्यारह गोमती चक्र पर तिलक लगा कर, इष्ट देव का स्मरण कर, उससे निवेदन करें, कि मेरा पैसा जल्द से जल्द लौटा दो। इसके बाद पूजित गोमती चक्रों को पीपल के वृक्ष के पास जमीन में दबा दें।5--व्यापार में हानि, धन नाश, बढ़ते कर्ज, व्यापार में बाधा आदि से मुक्ति पाने के लिए। दीपावली के दिन श्वेतार्क गणपति को गंगाजल से स्नान कराकर लाल वस्त्र पर रखें। फिर उनके समीप लाल चंदन का एक टुकड़ा, ग्यारह धनदायी कौड़ियां, ग्यारह गोमती चक्र एवं तांबे की पादुकाएं या तांबे का एक टुकड़ा रखें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सफेद कागज पर लाल चंदन से अपनी दुकान का नाम लिखकर इसी सामग्री के पास रखें। लाल चंदन की माला से ‘‘ॐ गं गणपतये नमः’’ का एक माला जप करें। लाल चंदन की माला न हो तो रुद्राक्ष की माला से भी जप कर सकते हैं। फिर सारी सामग्री को उसी लाल वस्त्र में लपेट कर पोटली बना लें और उसे लाल मौली या रिबन से बांधें, धूप दीप दिखाएं व व्यापार स्थल में उत्तर पूर्व दिशा में बांध दें। नित्य प्रातः व्यापार शुरू करने से पहले, उसे धूप दीप दिखाएं। ऐसा करते समय मन ही मन गणपति के पूर्वोक्त मंत्र का जप करते रहे। ऋण मुक्ति का यह बहुत प्रभावी उपाय है।6--गाय को प्रतिदिन दो रोटी तेल लगाकर गुड़ रखकर खिलाएं, पक्षियों को दाना व जल दें और अपनी आय में से दो गरीबों को भरपेट भोजन कराते रहें, लाभ होगा।7--कार्यसिद्धि के लिए कार्यसिद्धि यंत्र अत्यंत फलदायी है। अपनी मनोकामना को लाल चंदन से भोजपत्र पर लिख लें। लाल या पीले वस्त्र पर कार्यसिद्धि यंत्र स्थापित करें। अगरबत्तियां व घी का दीपक जलाएं और आरती उतारें। कार्य सिद्ध हो जाने पर प्रभु के नाम पर कोई सत्कार्य जैसे कार्य करने को कहें। उदाहरणतया पांच गरीबों को भोजन कराने, या घर में भजन कीर्तन कराने या फिर कोई भी सेवा करने का प्रण करें, कार्य सिद्ध हो जाने पर उसे भूलें नहीं।अब भोजपत्र को तह करके कार्यसिद्धि यंत्र के नीचे रख दें। नित्य प्रति पांच अगरबत्तियां जलाएं और प्रतिदिन इक्कीस बार यंत्र के सामने अपनी भोजपत्र पर लिखी मनोकामना को दोहराएं, अगरबत्तियों को मुख्यद्वार पर लगाएं। कुछ ही दिनों में आपका कार्य सिद्ध हो जाएगा।8--यदि कमाई का कोई जरिया न हो, तो एक गिलास कच्चे दूध में, चीनी डाल कर जामुन वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं। यह क्रिया धनतेरस से शुरू करें और चालीस दिन लगातार करें। कभी-कभी सफाई कर्मचारी को चाय की 250 ग्राम पत्ती या सिगरेट दान करें। सफेद धागे में दीपावली पूजन के पश्चात तांबे का सिक्का गले में पहनें। उस दिन रसोईघर में बैठकर भोजन करें। लाभ स्वयं महसूस करेंगे।9--घर में यदि किसी दिन कोई बच्चा सुबह उठते ही बिना कारण रोने लगे तो प्रत्येक सदस्य को बीस मिनट तक ॐ का उच्चारण करना चाहिए।10--दीपावली पूजन में लकड़ी की एक डिब्बी में सिंदूर की एक परत बनाकर उस पर पांच गोमती चक्र रखें और फिर सिंदूर से पूरी डिब्बी को भरकर लाल वस्त्र में लपेटकर धन स्थान में रख दें। जीवन भर पैसे का अभाव नहीं रहेगा।11--धन की आय, नित्य निरोग रहना, स्त्री का अनुकूल तथा प्रियवादिनी होना, पुत्र का आज्ञा में रहना तथा धन पैदा करने वाली विद्या का ज्ञान - ये छः बातें इस मनुष्य लोक में सुखदायिनी होती हैं। विदुरनीतिलक्ष्मी जी धन, ऋद्धि- सिद्धि तथा ऐश्वर्ययिनी हैं। उनके बिना देवता भी श्रीहीन हो जाते हैं। पुराणों में कथा है कि जब लक्ष्मी जी इंद्र से असंतुष्ट होकर क्षीरसागर में चली गईं तो स्वर्ग ऐश्वर्यहीन हो गया। सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से निवेदन किया और समुद्र मंथन किया गया। समुद्र से लक्ष्मी जी के साथ चैदह रत्न भी प्राप्त हुए। लक्ष्मी जी ने विष्णु भगवान का वरण किया। देवताओं ने लक्ष्मी जी से निवेदन कर उनका पूजन किया और लक्ष्मी जी ने प्रसन्न होकर धन ऐश्वर्य प्रदान किया। लक्ष्मी जी देवलोक में स्वर्गलक्ष्मी के नाम से, पाताललोक में नागलक्ष्मी, राजाओं के यहां राजलक्ष्मी तथा गृहस्थों के यहां गृहलक्ष्मी के रूप में जानी जाती हैं। आठों सिद्धियां प्रदान करने वाली अष्टलक्ष्मी इस प्रकार हैं- धन लक्ष्मी, ऐश्वर्यलक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और अधि लक्ष्मी।लक्ष्मी से संबंधित साधना हेतु दीपावली सर्वश्रेष्ठ समय है। दीपावली कालरात्रि होती है। इस दिन यंत्र-मंत्र-तंत्र की सिद्धि शीघ्र हो जाती है। इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा हर व्यक्ति करता है। दीपावली लक्ष्मीजी को रिझाने का दिन होता है।12--दीपावली की रात्रि में:श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, कनक धारा श्री यंत्र या लक्ष्मी यंत्र को पूजा स्थल पर दीपावली पर स्थापित करें और वर्ष भर प्रतिदिन किसी भी लक्ष्मी मंत्र का एक माला जप करते रहें। इससे धन आगमन बना रहता है।13--धनदायक यंत्र: दीपावली की रात्रि को इस यंत्र को लाल चंदन से या कस्तूरी से या गोरोचन से अखंडित भोजपत्र पर अनार की कलम से लिखें और गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के साथ पूजा स्थल पर स्थापित करें और कमलगट्टे की माला से निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जप करें। मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।बाद में इसी मंत्र को जपते हुए घी की आहुति 21 बार हवन में डालें। पूजन के पश्चात इसे धन रखने की जगह तिजोरी आदि में रखें। धन की बरकत बनी रहेगी।14--दीपावली के दिन अपने पूजा स्थल में प्राण प्रतिष्ठा युक्त श्री यंत्र या कनक धारा यंत्र की स्थापना करें और श्री सूक्तम के बारह पाठ करें और फिर प्रतिदिन दैनिक पूजा के साथ श्री सूक्तम के बारह पाठ करते रहें। इससे धनाभाव निश्चित रूप से दूर होता है।15--दीपावली के दिन कमलगट्टे की माला से ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नमः’ मंत्र का जप करें। ऐसा करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। फिर नियमित रूप से प्रतिदिन इससे एक माला जप करते रहें। इससे सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।चैंतीसा यंत्र: यह यंत्र सुख समृद्धिदायक माना गया है। इसे दीपावली की रात्रि या रवि पुष्य या गुरु पुष्य के दिन केसर की स्याही और अनार की लेखनी से भोज पत्र पर लिखंे। इसके बाद इसकी षोडशोपचार पूजा करें। यंत्र लिखते समय लक्ष्मी जी के किसी मंत्र का जप करते रहें। फिर इसे घर में या अपनी दुकान में कहीं भी रख सकते हैं। इससे लक्ष्मी जी का आगमन बना रहता है।16--व्यापार हेतु लाभदायक: यदि आप निरंतर व्यापार में घाटे से परेशान हैं तो यह प्रयोग अवश्य करें। इस यंत्र को चांदी अथवा सोने के पत्र पर किसी शुभ मुहूर्त में खुदवाएं। इसके लिए धन त्रयोदशी का दिन श्रेष्ठ है। फिर दीपावली के एक दिन पूर्व अर्थात् कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में इसे शुद्ध स्थान पर स्थापित करें। सफेद आसन पर बैठकर और सफेद वस्त्र पहनकर ‘‘ॐ ह्रीं श्रीं नमः’’ मंत्र का किसी भी सफेद माला से दस माला जप करें। यंत्र पूजन के लिए सफेद फूलों का प्रयोग करें। यह प्रयोग आगे 21 दिन तक करें। ऐसा करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। फिर इसे अपनी तिजोरी में या धन रखने के स्थान पर रखें, व्यापार में लाभ मिलने लगेगा ।इस प्रकार अनेकानेक यंत्र-मंत्र-तंत्र हैं जिनकी साधना कर हम धन समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। दीपावली के दिन अथवा किसी भी शुभ मुहूर्त में कोई न कोई साधना अवश्य करनी चाहिए ताकि धनागमन बना रहे इस बात को कभी न भूलें- लक्ष्मी जी का चित्र में मेरा कोई योगदन नहीं हैं मेरी पोती ने नेट से लोड कि हैं